रिश्ते....कुछ अनसुलझे सवाल


वक़्त बीत गया कुछ लिखा नहीं, कुछ कहा नहीं|  आज फिर यूँही कलम चलने लगी और दिल के कुछ जज्बात शब्दों में उकेरने की एक नयी कोशिश कर रही हूँ|  मेरी हर लिखावट हर कहानी के पीछे किसी न किसी शख्स से जुडी बातें या उसकी यादें होती हैं| इन दिनों कुछ ऐसा ही हुआ कि लगा ज़िन्दगी कभी रूकती नहीं  चाहे कितने ही आंसू बहा लो| न ही किसी को दोष देने से हालात ठीक होते हैं| ज़िम्मेदारी लेनी पड़ती है हर उस बात की जिसके लिए आप ज़िम्मेदार हैं| सिर्फ हालातों या किसी और को दोष देने से कुछ नहीं होता| हम जो चाहते हैं उसे हासिल कर लेते हैं और कई बार कुछ चाहतों के हाथों मजबूर होकर रिश्ते तोड़ देते हैं|

गलती किसकी है, क्यों है ये जानने की न तो हिम्मत होती है न ही इच्छा, कहीं न कहीं एक ग़लतफहमी को बनाए रखने की जिद होती है| एक ऐसी ग़लतफहमी जो खुद को तसल्ली देने के लिए काफी हो| प्यार का सप्ताह चल रहा है बोले तो वेलेंटाईन वीक, बहुत से दिल टूटे होंगे तो कई.. जुड़े होंगे| जिनके दिल जुड़े उनके लिए ये वीक लकी चार्म और जिनके टूटे उनके लिए अनलकी चार्म| अभी कुछ दिन  पहले  ही किसी ने  कहा कि यार दिल टूटे तो बहुत दर्द  होता है लेकिन कई बार आप न चाहते हुए भी उस शख्स  से दूर  जाने  पर  मजबूर  हो जाते  हैं| उलझन तो होती है लेकिन अगर आप खुद से या कहें अपने सेल्फ रिस्पेक्ट से प्यार करते हैं तो ये कदम उठाना ज़रूरी हो जाता है| लगा बात में दम तो है|

इस बारे में सोचा तो समझ आया, ज़िन्दगी की शुरुआत से लेकर खत्म होने तक हम हमेशा रिश्तों में उलझे रहते हैं| कभी कोई नया रिश्ता जुड़ा तो कभी पुराना टूट गया| एक नया रिश्ता जुड़ा तो हम ख़ुशी से फुले नहीं समाते और जब कोई रिश्ता टूट जाए तो ऐसा लगता है मानों ज़िन्दगी खत्म हो गयी| कुछ रिश्ते पहले से बने होते हैं जिन्हें हम खून का रिश्ता कहते है, इनसे अलग होने की टीस तो होती है लेकिन शायद इतनी नहीं कि लगे अब ज़िन्दगी में कुछ बाकी नहीं|

खून के ये रिश्ते अगर दूर जाते हैं तो इनके पास होने का एहसास होता है क्योंकि इनके टूटने की वजह एक नए रिश्ते का जुड़ना होता है| कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो हम जोड़ते हैं हमेशा साथ चलने के लिए लेकिन वक़्त कुछ ऐसा खेल खेलता है कि ये रिश्ते यादें बनकर हमेशा के लिए दिल की किताब में दबे रह जाते हैं| इन रिश्तों के टूटकर भी जुड़े रहने का तो यकीन होता है लेकिन कहीं न कहीं कुछ सवाल सामने आकर खड़े हो जाते हैं|
चाहे दोस्ती हो या प्यार ये रिश्ते हम खुद जोड़ते हैं| जब ये रिश्ते जुड़ते हैं तो लगता है कि दुनिया की सारी खुशियाँ हमें मिल गयी हैं| कुछ वक़्त पहले एक शख्स से मिली, उससे बात करते हुए ऐसा लगा की रिश्तों को समझने के लिए भी कोई इंस्ट्रूमेंट होना चाहिए| उससे बात करते करते ऐसा लगा की चाहे दिमाग की कितनी भी तारीफ़ की जाए लेकिन भावनाएं हमेशा प्रबल होती हैं| कई बार हम सही रिश्ते को इसलिए खो देते हैं क्योंकि हमें लगता है की वो शख्स गलत है जिससे हम रिश्ता रखना चाहते हैं| और इस प्रबल भावना के चलते कुछ गलत लोगों को अपने साथ रखने की जिद बाँध लेते हैं|

कभी यह भावनाएं हमें ताकत देती हैं तो कभी हमें कमजोर बना देती हैं| गलती किसीकी नहीं, बस जरूरत होती है कि हम असलियत से भागना छोड़कर उसे मानें| हमेशा हालातों का रोना रोकर ज़िन्दगी नहीं बिताई जा सकती| प्यार और जज्बात हर दिल में होते हैं लेकिन हमारे जज्बातों  की वजह से किसी को ठेस पंहुचे ये कहाँ तक सही है, इस बारे में हमें सोचना है| आखिर किसी भी रिश्ते की पहल कहीं न कहीं हमारी तरफ से होती है, हालातों की तरफ से नहीं| कदम तभी साथ निभाते हैं जब इरादे सच्चे हों|

"रिश्ता" इस शब्द में बहुत गहराई है, लेकिन जब हम इस गहराई को अपनों से छुपाने की कोशिश करते हैं तो यही रिश्ते अनसुलझे सवाल बन जाते हैं| अपनों को धोखा देते हैं किसी और को पाने के लिए और जब ये साथ छूटता है तो अबूझ पहेली बन जाता है| रह जाते हैं तो बस कुछ सवाल| ये हमारे हाथ में है कि हम किसीकी ज़िन्दगी से चोट देकर जाना चाहते हैं या उसके सवालों का जवाब बनना चाहते हैं| रिश्ता बनाईये लेकिन एक अनसुलझी पहेली नहीं| उम्मीद है बहुत जल्द इस अनसुलझे सवाल का जवाब कहीं न कहीं ज़रूर मिलेगा|

पाब्लो नेरुदा के शब्दों में-

अब मैं उसे प्यार नहीं करता हूँ....
उसमें कोई शक, नहीं
लेकिन शायद उसे प्यार करता हूँ|




फिर एक सवाल.......

4 Responses so far.

  1. kUCH BHI KAHNE RAHA HI NHI.sab kuch to tumne khud kah diya..Bhawna(Feeling)

  2. NIce One Dear ............

  3. Good expressions ..and very thnx to you, bcz BT back with pens and thoughts ! ! keep it dear !

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