छुपा मन का अंधेरा राह पर अपनी ही धुन में मस्त बच्चों को देखकर लगता है कि ज़िंदगी बहुत आसान है. कुछ समय बाद जब यही बच्चे अपनी मंज़ि... [...]

चाचा जी के एक परम मित्र और हमारे 'चचाज़ फ्रैंड' चाचा के ब्लॉग- सोत्डू पर एक पीस अच्छा लगा, जिसे हू- ब- हू  आपसे शेयर कर रही हूं. ... [...]

आज अपनी दुनिया के माहिर नाम जब अपनी बीती जिंदगी की तरफ देखते होंगे तो एक हल्की सी मुस्कान होठों पर बिना किसी की बात सुने दौड़ी चली आती होग... [...]

जिंदगी के कुछ पल स्ट्रीटलाइट की तरह होते हैं, वो राह को छोटा नहीं बनाते लेकिन राह को रौशनी से भर देते हैं और सफर को यादगार बना देते ह... [...]

किसी भी बच्चे से सवाल करिए कि हमारे देश में हिन्दी का पद क्या है ? बिना समय लिए वो बच्चा बोल उठेगा राष्ट्रभाषा बच्चे ही क्यूं दुनिया घ... [...]

अगर आप सोच रहे हैं कि मैं किसी रोमैंटिक नाइट के बारे में लिखने जा रही हूं तो आप गलत हैं| शायद कभी मुझे डेट पर जाने का मौका भी मिले तब भ... [...]

लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता और जनसम्पर्क विभाग को देखकर एक ही गीत याद आता है, ‘हम तो चले परदेस, हम परदेसी हो गए’| सच मानिए ये कोई मजा... [...]

शब्दों का सफर ........: जारी है मौसमी परिवर्तन का दौर : इस बार का मित्रता दिवस मेरे जीवन में कुछ ख़ास रहा. हाँ! जानती हूँ मेरी लाईफ में आपको... [...]

इस बार का मित्रता दिवस मेरे जीवन में कुछ ख़ास रहा. हाँ! जानती हूँ मेरी लाईफ में आपको क्या इंटरेस्ट, मैं कोई सेलिब्रिटी तो हूँ नहीं. ये सब... [...]

आज रामू बहुत दुखी है, हो भी क्यों न! मंहगाई जो बढ़ गयी है| आलू, टमाटर,प्याज यहाँ तक कि हरी मिर्च जैसी छोटी सी चीज़ भी उसकी आँखों में आंस... [...]

हवाओं के सहारे, तेरी याद ने दी दस्तक दिल को लगा जैसे, रिमझिम बरखा आने वाली है बारिशों के इस मौसम में, रुख बदलती हवाओं ने, जैसे कुछ है ... [...]

न जाने क्यूँ कुछ सवालों के जवाब नहीं होते न जाने क्यूँ दिल होते हुए भी अरमान नहीं होते यूँ तो ढूंढते हैं गम-ए-तन्हाई में... [...]