ऑनलाइन दुनिया में सबको है एक अदद दोस्त की तलाश


22 साल का दीपक एक मल्टिनेशनल कम्पनी में जॉब करता है| उसके दोस्तों के बारे में पूछे जाने पर शायद ही उसे ऐसा कोई दोस्त याद आया जिससे मिलकर उसने अपने दिल की बात कही हो लेकिन हाँ! उसके फेसबुक दोस्तों की फेहरिस्त बेहद लम्बी है| हालांकि इस लम्बी फेहरिस्त में एक भी नाम ऐसा नहीं है जिसे वह अपना करीबी बता सके| कमोबेश यह हाल सिर्फ दीपक का नहीं देश के हर युवा का है| सोशल नेटवर्किंग साइट्स की इस आभासी दुनिया ने एक ऐसा चक्रव्यूह बना दिया है जिसे तोड़कर बाहर निकल पाना इतना आसान नजर नहीं आता|

इस बारे में चार लोगों से एक सवाल पूछिए, जवाब हर बार अलग मिलेगा| कोई यहाँ नए-नए दोस्त बनाने के लिए अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है तो कोई अपने दुखों से पीछा छुड़ाने के लिए| कहने वाले यहाँ तक कहते हैं कि यह सोशल मुद्दों से जुड़ने का आसान जरिया है| देखा जाए तो यह एक खुला मंच है, जहां आप अपनी भडास भी निकाल सकते हैं और ब्लैकमेल भी हो सकते हैं| न तो यहाँ आना इतना आसान है न ही यहाँ से जाना| बस हाथ मिलाते जाने की एक नई प्रवृत्ति ने जन्म ले लिया है|

यह एक ऐसी दुनिया है जहां सामाजिक संवाद का विस्तार होता है और लोग बिना किसी झिझक के सामाजिक मसलों पर अपनी बात कह सकते हैं| इंटरनेट के समय में एक नए ऑनलाइन समाज ने जन्म लिया है लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह समाज, वास्तव में सामाजिक जिंदगी को कुछ बेहतर बना रहा है या फिर यह एक मृगतृष्णा है? कम्प्युटर स्क्रीन के सामने बैठा हर इंसान यहाँ अपनी-अपनी वजह से है लेकिन एक छुपी हुई सच्चाई यह भी है कि यहाँ हर किसी को एक दोस्त की तलाश है| लोग सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तमाल एक अदद दोस्त ढूँढने के लिए कर रहे हैं| सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर होने वाली दोस्ती की ये तलाश और खुशी देने वाली ये दोस्ती बहुत से रोचक सवालों की ओर ले जाती है| एक प्रोफाइल पर सैकड़ों दोस्त देखकर जहन में यह सवाल अपने आप उठता है कि क्या वास्तव में वे हमारे दोस्त हैं या ‘ऑनलाइन दुनिया से जुड़े रहने का यह एहसास’ वास्तव में ‘कम अकेला महसूस’ करने का एक छलावा मात्र है !

शायद इन सभी सवालों का कोई एक जवाब नहीं, जितने यूजर्स उतने जवाब| रोज स्टेट्स अपडेट करना एक फैशन सा हो गया है भले ही उस स्टेट्स का कोई औचित्य हो या न हो| यदि आप रोज अपनी प्रोफाइल अपडेट नहीं करते तो मान लीजिये आप आउटडेटेड हैं| खिल्ली उड़ाने की यह एक ठोस वजह हो सकती है और हो सकता है आप किसी दूसरे के स्टेट्स के लिए बैस्ट ऑप्शन बन जाएं| इन साइट्स पर चौबीस घंटे समाचारों का अपडेट मिलता रहता है वो भी बिना किसी ब्रेक के| अगर आप समाचारों, चटपटी गॉसिप के प्रेमी हैं तो आप बिलकुल सही संसार में पंहुच चुके हैं| दोस्तों और समाचारों की इस पसंदीदा दुनिया में ट्विटर, फेसबुक, मायस्पेस, ऑरकुट, बेबो, हाई5, जैसी साइट्स धूम मचा रही हैं|

सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि नशा बनता जा रहा है| दिन में दस बार बिना मतलब के लॉगइन होना जैसे एक जरूरत सा बनता जा रहा है| इस दुनिया में सच्चे दोस्त की ये तलाश कई बार कामयाब भी होती है लेकिन ज्यादातर तलाश खत्म होती है एक हताशा भरे अँधेरे के साथ| चिट-चैट की ये दुनिया कई बार एक छलावा साबित होती है| जरूरी है कि इस दुनिया में कदम रखने से पहले हम ख्यालों की दुनिया से बाहर निकल इसकी असलियत को पहचाने और इस वर्चुअल दुनिया के फेर में अपने दोस्तों से दुरी न बना लें| अब आखिरी फैसला तो इस दुनिया में कदम रखने वाले उस शख्स का है जिसे एक अदद सच्चे दोस्त की तलाश है|

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5 Responses so far.

  1. Kaafi had tak ek sacchiae se rubaroo karata post....
    Aur me isse bahut jyada sahmat hoon, facebook ya social netwaorking friends ko yaad karte karte hum apne real friends se door hote ja rahe hai....

  2. Bhawana I am speechless for your NOte ...nice thinking crystal clear and very true words .....

  3. भावना इस वर्चुअल दुनिया में आने से लोगों को जो पहचान का संकट था वो दूर करने में मदद मिली है. तुमने एक अच्छा मुद्दा उठाया है. प्रशंसनीय.

  4. ur writing style fabulous, topical ...:) again good one bt !

  5. u wrote something which is always on mind....a virtual world is only virtual..... lucky ones hv its outfit as real .... anyways ...keep going Bhavna......
    m following u...and request u to follow me as well @ ajitbiomed.blogspot.com

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