देश मस्त और हम राजी-खुशी...


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सुना है कल दो अक्टूबर था- मोहनदास करमचंद गांधी का जन्मदिन, हां-हां वही, बापू का जन्मदिन ! लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिन भी तो था... अरे वही, पूर्व प्रधानमंत्री थे ना हमारे...

क्या बात करते हो यार इनमें से कुछ भी नहीं था- कल था स्वछता दिवस. झाड़ू-वाडू लेकर साफ़-सफाई करते हैं इस दिन. वैसे तो ईजा रोज साफ़-सफाई करती है लेकिन अपना भी कुछ बनता है न यार. आखिर एक दिन तो झाड़ू हाथ में ले ही सकते हैं और हां खबरदार जो एक दिन के बाद झाड़ू हाथ में भी लिया, फिर इस दिन का महत्व क्या रह जाएगा. आप लोग भी ना समझते ही नहीं हैं. वैसे हम किराए के मकान में रहते हैं तो भईया जी ने झाड़ू नहीं दिया, क्या है न कि उन्हें डर लगा रहता ही कहीं मकान मालिक से शिकायत कर दी तो. उनके साथ बहुत सारे पंगे हैं न. खैर, हमने चोरी से झाड़ू लगा ही लिया. आप बताइएगा मत उन्हें. 

बहुत मन था बापू और शास्त्री जी को जन्मदिन की बधाई देने का लेकिन दे नहीं पायी. कभी मुलाकात ही नहीं हुई, नाराज हूं उनसे. असल में उनका पता नहीं मालूम जहां चिट्ठी-पत्री भेजी जा सके. बहुत सारी बातें हैं जो उन्हें बतानी हैं. पापा ने बताया था कि बापू और शास्त्री जी को देश की बहुत चिंता थी. तो उन्हें बताना था कि देश की चिंता ना करें. देश में सब कुछ बहुत बढ़िया है, एकदम चकाचक- तो चिंता करने की कोई बात ही नहीं. बापू को तो लोग हर मिनट याद करते हैं. आपके आदर्श आज भी जिन्दा हैं. सब कहते हैं कि सच बोलना अच्छी बात है. 

बापू जी, वैसे तो गोलियां आज भी चलती हैं. पता है बेसिरपैर की बात पर किसी निर्दोष की हत्या भी हो जाती है और कोई इस बात की तारीफ़ नहीं करता. पता है आपको, अभी कुछ ही दिन पहले अखलाक को मार दिया गया. आपने अखलाक को पहचाना नहीं ? अरे वही, जो दादरी में रहता था. लोग कह रहे हैं गाय को मारने का शक था उसपर, मारने वालों ने जानने की जरूरत नहीं समझी के सच क्या है. आजकल बड़ा हो-हुल्लड मचा हुआ है. अरे शास्त्री जी, आपको बताऊं हमारे नेता इतने अच्छे हैं कि तुरंत अखलाक के घर गए. बड़े दुखी हैं हमारे नेता, अरे अपने व्यस्त समय से समय निकलकर चैनलों के दफ्तर भी जाते हैं और एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं. कहते हैं अखलाक को न्याय मिलेगा. मिल ही जाएगा. कुछ नया भी हुआ है शायद न्याय के काबिल, अब आप भी कितना सुनेंगे.

इतना ही नहीं, देश में बलात्कार के मामलों में न्याय मिलने का समय तेज हो गया है. देश में खूब विरोध होता है. मोमबत्ती मार्च और ऐसा ही बहुत कुछ, ऐसे ही थोड़े निपटारा हो जाता है इन मामलों का. अब कितनी संख्या में, ये नहीं बता सकती. हर मिनट नई खबर आ जाती है ना. वैसे दामिनी को आज भी याद करते हैं लोग लेकिन लोगों की बात भी सही है- आखिर रात में बाहर निकली क्यों, पागल थी क्या ? वैसे समझ नहीं आया बलात्कार की शिकार हुई पांच साल की बच्ची तो घर पर ही थी!

पता है बापू, बिहार चुनाव भी नया है. रैलियां हो रही हैं आजकल और किसानों की बात भी. किसानों के सम्मान में किसी तरह ही कमी नहीं आई और भूखमरी भी वैसी ही है. वैसे तो सब्जियां, दाल, अनाज सबकुछ मंहगा है लेकिन पुरानी प्रथा बरकरार है... किसान को कुछ नहीं मिलता. शास्त्री जी, आप यकीन नहीं करेंगे, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, वैसे नेता लोग कह रहे हैं कि वे ध्यान दे रहे हैं किसानों का. बाकी तो सब ठीक है. दरअसल, उन्हें परम्परा निभाने में सुख मिलता है. वैसे बाकी सब बढ़िया.

अरे देश के लोग भी कमाल हैं, लोकतंत्र भी मजबूत है. कल मस्त छुट्टी मनाई. शॉपिंग की, झाड़ू लगाया और आप दोनों को भी याद किया (छुट्टी तो आपकी ही बदौलत थी ना...)
खैर, यही सब बताना था आपको, तो आप चिंता न करना सब ठीक है. हम राजी-खुशी हैं ... 


(भावना तिवारी- it’s all about feelings)

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One Response so far.

  1. समसामयिक विषयों को इस दिवस पर जोड़ने का अच्छा प्रयास क्या ; कुछ निरंतरता की कमी लगी और निष्कर्ष में लेखक का पक्ष स्पष्ट नहीं हुआ ।। लिखते रहिये ।। :)

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