yaaden yaad aati hain....

जाते जाते पहली बार कुछ ऐसा हुआ जिसमें सभी का साथ मिला....दिल में थोडा डर था पर फिर भी वर्ल्ड कप का जोश था, कितने महीनों से अपने पत्रकारिता एवम जनसंचार विभाग के डिस्प्ले बोर्ड को सजाने के बारे में सोच रहे थे पर वही ढ़ाक के तीन पात...पर एक दिन अचानक रात अनमता का फ़ोन आया और उसने कहा कल बोर्ड को सजा देंगे, हमने कुछ बनाया है और सारा सामान ले आये हैं बस तुमलोग आ जाना ...दुसरे दिन जब यूनिवर्सिटी पहुंचे तो सच में कुछ था...
कुछ चार्ट्स, कुछ विचार और कुछ फूल-पत्तियां...और सबसे ख़ास बात टीम इंडिया के लिए शुभकामनायें, उसे लगाते समय डर लगा के कहीं सबकुछ उल्ट-पुलट न हो जाये...नेहा ने बोला "यार ये चार्ट लगा तो रहे हैं पर कहीं उतारना न पड़े" ये डर एक हद्द तक सही भी था और हमसभी के ज़हन में ये बात थी...आखिर इतने सालों बाद अपनी टीम से जीत की उम्मीद थी, हम भी उस टीम का एक हिस्सा थे...इसी उधेड़ बुन के साथ हमने उस बोर्ड का कायाकल्प करना शुरू किया और इसमें मुकुल सर ने हमारी मदद की....क्युंके हमेशा की तरह हमारे पास आधा-अधुरा सामान था...
शायद इन सब बातों में ऐसा कुछ ख़ास नहीं बस ख़ास था हमारे साथियों का साथ, पर सबसे ख़ास बात है अनमता की जिद...उसने शुरुआत की और हम सभी ने उसका साथ दिया..धीरे-धीरे बोर्ड सजता गया, पहले उसका रूप थोडा बदला गया...;फिर लगे फूल-पत्तियां, अनमता के विचार, हमारा लिखा हुआ लेख, सबकी शुभकामनायें टीम इंडिया के नाम......कल जाकर देखा तो वहां कुछ नया लगा हुआ था....अच्छा लगा देखकर, हमारे सिनिअर इरफ़ान शाहिद का लखनऊ के उपर छपे एक लेख की कटिंग.....
ये पोस्ट बस सभी को शुक्रिया कहने के लिए लिख रही हूँ , उन यादों के लिए जिनकी सूत्रधार अनमता है और इन यादों को बुनने में साथ दिया नेहा, अभिषेक, दीपू और प्रियंका ने....पर एक और शख्स है जिन्होंने इन यादों को बुनने की राह दी और वो हैं हमारे मुकुल सर, जो बस एक बात हमेशा कहते हैं " लगे रहो, मंजिल कभी न कभी जरुर मिलेगी "....शुक्रिया सर
और सबसे जरूरी बात शुक्रिया टीम इंडिया जिसने इतने सालों बाद वर्ल्ड कप जीत कर दिखा दिया के हममे दम है, जज्बा है जीतने का...हमें हराना इतना इतना आसन नहीं और आज भी कुछ है जो धर्म, मज़हब और राजनीती से उपर है जो देश को एकता के सूत्र में पिरोता है...जो भी हो उस चार्ट को निकलने की नौबत नहीं आयी  और यादें....उस पल की happy ending हुई....
कुछ तस्वीरें हैं जो इन लम्हों को शब्दों से ज्यादा बयाँ कर सकती हैं...शायद कुछ ख़ास न लिखा हो पर ये पल जरुर ख़ास हैं अगर दिल से महसूस करें तो..

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12 Responses so far.

  1. thanx shubhi.....n we missed u dear

  2. बहुत बढ़िया अभी एक मंजिल आयी है और अभी बहुत सी आनी है

  3. Anonymous says:

    bahut acha likha hai,

    priyanka

  4. बस यादों के हर रंगों को सजाते रहिये ! !
    A good pictorial thoughts .. long but less than epic !

  5. neha says:

    ha yaar taalte taalte finallly hmlogo ne board saja hi dia.....bht yaaad aayega ye waqt..... acha likha h.

  6. @mukul sir: shukriya sir...baki manzilon ko pane ki koshish jari h

  7. @priyanka: thanx dear...

  8. @sujit: shukriya....pictures speak more den words..

  9. @neha: haan yaar..yaad to bht ayega ye sb..

  10. good yar,waqt ke sath sab bhul jata hai kyoki kuch nai chije purane ka jagah le leti hai aur ye hona bhi chahiye nhi to insan aur bhi jyada emotional hone lgega aur piche ki dunia ko sochkar age ka rasta tay karna kathin ho jaega

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