कश्मकश ज़िन्दगी की....


"ज़िन्दगी एक कश्मकश है यारों....
ना समझे ना समझाये किसीको ये यारों ....
ठोकर मार के हसती है यारों ...
कहती है संभल पाओ तो सम्भलना यारों..."
ना जाने रोज़ कितनी ही परेशानियों से दो-चार होते हैं हम, कभी कभी तो ऐसा लगता है जैसे ज़िन्दगी हमसे बदला ले रही हो... कभी तो उदासी और निराशा का ऐसा दौर चल उठता है मानो अब इससे निकल पाना नामुमकिन हो I पर  कहते है ना दुनिया में कुछ लोग तो अलग होते ही हैं, जो ज़िन्दगी की सचाई से रूबरू होना और उनका  सामना करना पसंद करते हैं I मगर जब वो सामने होते हैं तो ना ही हमें ये बात पता होती है के कितनी मुश्किलों से वो अपने सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे  है, ना ही हम जानने की कोशिश करते है....कहते हैं ना "घर की मुर्गी दाल बराबर" I  हम बस यही सोचते रह जाते हैं, इसमें क्या खास होगा..I
ऐसा ही एक शख्स मेरी ज़िन्दगी में भी है, जिसे देखकर लगता है के इसमें क्या खास है पर जब साथ बैठो और बातें करो तो ज़िन्दगी के कई रंग उभर कर सामने आते हैं I सावला रंग, छोटा कद्द ,काले बाल...खैर ये तो रही बाहरी बनावट जो सिर्फ आँखों को लुभाने के लिए ज़रुरी होती है I इससे इतर भी बहुत कुछ है जानने के लिए I जहाँ एक कर्कश आवाज़ कानो को दुखी करने का काम करती है, वहीं दूसरी तरफ जब कोई बात धीमी आवाज़ में बोली जाये तो वो बात दिल  को भाती  है....और ये कला हमारे इन दोस्त के पास है I

लीजिये इतनी बातें हो गयी पर हमने आपको अपने उस दोस्त से रूबरू तो करवाया ही नही I हमारे इस दोस्त का नाम है राहुल, इनके और हमारे शौक थोड़े बहुत एक जैसे हैं....पर अंतर ये की उन्होंने अपने शौक को एक रूप दे डाला है I ये शौक है नाटकों में अभिनय करने का, हम तो बस सोचते रह गये और इन्होने अभिनय कर भी डाला I 'रैगिंग'   नाम से बने एक नाटक  में इन्होने भी अभिनय करा और और इस सपने को पूरा करने के लिए पूरी लगन और मेहनत के साथ उम्मीदों  के पंख फैलाये ज़िन्दगी का सफ़र तय कर रहा है I ना जाने लोगों को कितनी तकलीफें होती हैं, सिर्फ घर से बाहर निकलने में...तो सोचिये उसका क्या जो खुद के घर में एक किरायेदार सी ज़िन्दगी जी रहा हो I
सुबह ६ बजे घर से निकल जाना फिर १० बजे घर पहुचना, मानो कोई पेईंग गैस्ट हो.....कोई आसान ज़िन्दगी नहीं I एक ललक और सिखने की इच्छा जरूरी है ज़िन्दगी  में आगे बढने के लिए और इनदोनो का मिला - जुला रूप नज़र आता है इसमें I एक युवा ना जाने आँखों में कितने सपने सजाये हुए  ज़िन्दगी की दौड़ में सबसे आगे बढने की चाह में घर से बाहर निकलता है I पर एक बात है इस आशा-निराशा के बीच बड़ी ही फसाने वाली स्तिथि बनती है I सपनो और परिवार के बीच फंसी  हुई अजीब सी मनोस्तिथि होती है और यही परेशानी हमारे इन मित्र के साथ भी है, कभी-कभी इनके साथ कश्मकश का एक दौर सा चल पड़ता है और खुद के ख्याली पुलाव में ही उलझ कर रह जाते हैं I या यूँ कहिये के इस तरह से ये युवा पीढ़ी का एक सटीक उदाहरण रखते हैं I 

ज़िन्दगी जीने  का अपना ही नज़रिया है  इनका I पढ़ाई के साथ साथ खुद को प्रोफेसनल तरह से बिज़ी रखना आता है इन्हें फ़िर  भी "दिल तो बच्चा है जी, थोडा कच्चा है जी " परेशान हो ही जाता है, शायद आज की ज़िन्दगी है ही ऐसी...लोगों की भीड़ में भी  ऐसा महसूस होता है जैसे हम बिल्कुल अकेले हैं और राहुल भी इस भावना से अछुता नही I हर पल, हर दिन एक अधूरी कहानी की रचना  करता है और दुसरे ही पल एक नई कहानी रच डालता है..इस बात को एक बैथ्त्र तरीके से समझना चाहे तो आमिर खान की ३ इदिअत   इसका सटीक उदाहरण है , उसमे एक गीत है: 'आल इज  वैल'  जो शायद उसकी मनोस्तिथि  को समझाता  है I  
"पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा..
बेटा हमारा ऐसा काम करेगा..
मगर ये तो कोई ना जाने
के मेरी मंजिल है कहाँ "
ह्म्म्म...इतना कुछ कहा  मैंने     मगर असल मुद्दा तो ये के इतनी कहानी हमने बस इसलिए सुनाई ताकि आज के युवाओं की सोच आप सभी के सामने रख सकूं..सच है के हम अपनी ज़िन्दगी खुद अपनी तरह से जीना पसंद करते हैं I पर हम गैर ज़िम्मेदार नहीं, पता है हमें...जानते हैं हम बहुत सी उमीदे जुड़ी है हमसे I एहसास है हमें अपनी जिम्मेदारियों का, सिर्फ मौज-मस्ती ही हमारा शौक नही ....बल्कि एक जरिया है अपने अकेलेपन  को दूर करने का-
"ज़िन्दगी रोते   हुए  काटी नही जाती....
सपनो के सहारे बितायी  नहीं  जाती
सपने तो ज़रिया हैं एहसासों को जगाने का
बिना सपनो के मंजिल पायी नहीं  जाती" 
राहुल के सहारे मैंने उस युवा को  आपके सामने लाने  की कोशिश की है...जो अपने सपनो की तरफ धीरे धीरे कदम बढ़ा रहा है  I  पर कभी कभी निराशा के बादल उसे चारों  तरफ से घेर  लेते हैं, जिसकी  वजह से वो इतना अकेला हो जाता है के वो मुस्कुरा तो सकता है मगर उसकी इस मुस्कुराहट की सचाई सिर्फ वो खुद जानता है....मगर दुनिया के लिए वो एक  लापरवाह  इंसान है जिसे अपनी ज़िन्दगी से खेलना  पसंद है और ना ही  उसके लिए रिश्तों की कोई एहमियत  है I बस चन्द शब्दों में आपको  एक युवा की बातें समझाना चाहती हूँ :


" ज़िन्दगी हमेशा एक खेल रही,


कही जो बात वो मज़ाक बन गयी,
चाह था हरपाल खुशियों को पाना,
लेकिन पड़ा हरपल उन्ही को खोना...
जीत कर भी हम सदा हारा किये,
खुशियों से भी कुछ ना हम पाया किये,
उम्मीद करी जब भी आकाश की,
मिली धुल हमको उसी ख़ाक की....
देखना है कबतक इम्तेहान जारी रहेगा,
किस्मत का पलड़ा कबतक भरी रहेगा,
हम भी करेंगे इंतज़ार उस वक़्त का,
जब देगी किस्मत साथ मेरे वक़्त का......"

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15 Responses so far.

  1. wahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh .............i dnt have words............it was sooo sooo gooood

    m follwing u nw

  2. Achcha hai.....common issue, raised in very common manner.

  3. @dreamzweaver: thanx dear...

  4. @ajitbiomed: thank u so much 4 ur precious comment

  5. also following u nw.......noticed....can u do the same??

  6. @ajitbiomed:sure, why not...

  7. @ajitbiomed:ur blog address plz???

  8. .....बहुत अच्छा भावना जी,लगातार अच्छी प्रस्तुति...

    "ज़िन्दगी रोते हुए काटी नही जाती....
    सपनो के सहारे बितायी नहीं जाती
    सपने तो ज़रिया हैं एहसासों को जगाने का
    बिना सपनो के मंजिल पायी नहीं जाती"......

  9. भावना बीच के पैराग्राफ में मामला गडबडाया है अंत में आपने अच्छा सम्हाला है आप सही रास्ते पर हैं बस इतना ख्याल रखना कि प्रतिदिन कुछ लिखना है मैं हमेशा नहीं रहूँगा पर एक बार आपका दायरा बढ़ जाएगा तो लोग आपसे जबरदस्ती लिखवा लेंगे तो ये जो दौर है इसको निकाल लो बस लिखते रहना है साथ में पढते भी

  10. acha likhi ho yar jitna uske bare me janti ho

  11. @ashish:ज़िन्दगी की सचाई से वाकिफ करने की छोटी सी कोशिश थी..

  12. @mukul:और अच्छा लिखने की कोशिश करूंगी सर..

  13. @deepu:शुक्रिया दीपू...

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