ये खूबसूरत लिखावट ..

"ए देख-देख सर आ गये  क्या?"
"नहीं आज दिखे तो नहीं"
"ना आयें तो मजा आ जाये यार"
ऐसे ही कुछ खूबसूरत पल और उनसे जुडी यादें I इन यादों का घरोंदा बनाते वो शिक्षक और ज़िन्दगी, जो कितना ही कुछ सिखाते हैं I शिक्षक वो जिनका हम मज़ाक उड़ाते हैं, कितनी ही बातें ऐसी जो सुनकर भी अनसुना कर देते हैं और ज़िन्दगी जो हमारा ही मज़ाक उड़ाकर चली जाती है, ना चाहते हुए भी अपनी हर बात कान में घोलती चली जाती है I कहते हैं एक शिक्षक पहले सिखाता है तब इम्तेहान लेता है मगर ज़िन्दगी एक ऐसी शिक्षक है जो पहले इम्तेहान लेती है और उसके बाद कुछ ना कुछ सिखाकर चली जाती है....अब चाहे वो आपको सुख दे या दुःख इसकी गैरेंटी ज़िन्दगी नहीं लेती I  
याद हैं वो दिन जब असेम्बली में खड़े होते थे और डाट पड़ती थी तो लगता था ना जाने अपने आप को क्या समझता है...टीचर है तो क्या हुआ फ़ीस दी है हमने कोई फ्री में तो पढ़ते नही I  और भी ना जाने क्या क्या, पर जब ज़िन्दगी अपने कड़क अंदाज़ में पढ़ाती  है तो मुँह खोलने का मौक़ा तक नहीं देती बस एक पल में सारे पाठ पड़ा जाती है और हम बस मुड-मंत्र उसे जाते हुए देखते रह जाते हैं....और उसके जाने के बाद एक नया पाठ हमें याद हो जाता है चाहे उसे आँखों में आंसू भरते हुए स्वीकार करें या होठों पर मुस्कान लिए I हम ये भी नहीं बोल सकते के ज़िन्दगी ने रिश्वत ली है  हमें पढ़ाने के लिए, ये तो एक ऐसी शिक्षक है जो जाने-अनजाने रोज़ कुछ ना पढ़ा जाती है वो भी फ्री ऑफ़ कॉस्ट I  
good morning ma'am
यूँ तो पैदा होने से लेकर मरने तक हमारी ज़िन्दगी में शिक्षकों का ताता लगा रहता है पर बहुत कम ही ऐसे टीचर होते हैं जो अपने विद्यार्थियों कि ज़िन्दगी में  अपनी छाप छोड़ पते हैं I कोई अपने पढ़ाने के ढंग कि वजह से तो कोई अपने अलग अंदाज़ कि वजह से, उनमें से कितने   ऐसे होते हैं जिन्हें हम ताउम्र चाहकर भी नहीं भूल पाते याद हैं वो नाम जो अपने टीचर से मिलते जुलते थे! और अन्दर ही अन्दर घबराहट होती थी के कहीं उन्हें पता ना चल जाये...पर फ़िर भी हम कहाँ मानने वाले I  जब बी कोई टीचर आने वाला होता तो दूर से ही इशारा मिल जाता..."चल-चल क्लास में चल चश्मिश आ रहा है, बाहर देखा ना तो फ़िर चिलाएगा" और सब चल पड़ते हैं क्लास कि तरफ I होठों पर हल्की सी मुस्कान आ जाती है जब ये शरारत भरे पल याद आते हैं, और कभी-कभी आँखों में नमी सी छा जाती है I  
वक़्त गुज़रने के साथ-साथ बदलता है टीचर का चेहरा, उनका अंदाज़, स्कूल का वो कड़क मास्साब कॉलेज में आते ही एक दोस्त बन जाता है, जो हमें बोलने का अधिकार देता है...उसका डरावना चेहरा एक हद्द तक बदल जाता है, पर उनमे से कुछ टीचर ऐसे दोस्त बन जाते हैं जिनका साथ आप कभी छोड़ना नहीं चाहते, वो प्रेरित करते है और आगे बढने के लिए हमेशा अपना साथ देते हैं I सब ऐसे ही होते हैं ये ज़रुरी नहीं, कुछ ऐसे भी मिले जिन्हें मतलब ही नहीं आप आते हैं या नहीं; आ गये तो आपका स्वागत है और नहीं आये तो भी I ख़ैर शिकवा नहीं किसी से ना ही शिकायत है, ज़िन्दगी और कुछ नहीं बस आपकी इंनायत है I एक टीचर को अच्छे और बुरे तराज़ू में तोलना शायद हमारी नाकामयाबी है, जिसे छुपाने के लिए हम उनका सहारा लेते हैं I यक़ीन ना आये तो ज़रा सोचिये जब क्लास होती है तो हम दुआ करते हैं आज क्लास ना हो और जब नहीं होती तो हम बोलते हैं यार क्लास होती ही नहीं I   ऐसा होता है ना!
चाहे जीने के कितने ही रंग बदलें, चाहे जीने के कितने ही ढंग बदलें पर एक टीचर ऐसा है जो ताउम्र एक जैसा रहता है और बिना फ़ीस के आपको जीने का अंदाज़ सिखा जाता है I वो टीचर है ज़िन्दगी....कभी बीती बातों से, कभी आने वाले कल से और कभी-कभी आज से कुछ ऐसा सिखा जाती है जिसे हम भुला नहीं सकते I ये सिखाती है, पढ़ाती है, हसाती है, रुलाती है और कभी-कभी मनाती है... ये एक ऐसी टीचर है जिसे ना डिग्री कि ज़रूरत है ना ही एंट्रेंस पास करने कि, फ़िर भी जब ये कुछ सिखाती है तो भागने के लिए कोई रास्ता नहीं बचता I  हम चाहें या ना चाहें पढना तो पड़ेगा ही, अपनी ड्यूटी पूरी करने के लिए वचनबद्ध  है ये I
कुछ भी कहिये बहुत उम्दा है ये टीचर.... आप भाग नहीं सकते, छोटे-छोटे वाक्ये, छोटी-छोटी घटनाये, ना जाने कब क्या सिखा जाये I  बस अपनी आँखें  खुली रखिये वरना कहीं ऐसा ना हो के जो बात आप हस्ते-हस्ते सीख सकते हैं वही बात ज़िन्दगी आपको रुलाकर सिखा जाये I ये कोई स्कूल  कि टीचर नहीं के आप इसे मुँह चिड़ा दें, ये वो टीचर है जो आपको मुँह चिड़ा दे I और शायद आपको ऐसा थप्पड़ मारे के आप रो भी ना पायें I ये कोई स्कूल नहीं के मनं करा तो चले गये और ना करा तो नहीं गये, क्या पता आप घर से बाहर निकले ही हों और ज़िन्दगी एक फलसफा समझा जाये I
टीचर एक ऐसा शख्स है जो हमारी ज़िन्दगी के हर पल में शामिल है बस उसके रूप अलग होते हैं I ज़िन्दगी कि शुरुवात में हमें माँ मिलती है जिसकी शिक्षा का कोई मोल नहीं और वक़्त के साथ-साथ अलग-अलग शिक्षक कोई दोस्त, कोई रिक्शे वाला, कभी-कभी हम खुद को बहुत कुछ सिखा जाते हैं I कोई ज़िन्दगी में धोखा खाकर समझता है तो कोई ठोकर खाने के बाद, पर एक चीज़ है जो इन सभी को एक माला में पिरोती है वो है जब ये पल बीत जाते हैं तब चाहे ये बुरे रहे हो, इन्होने हमें रुलाया हो या ये ख़ुशी के पल हों जिन्होंने हमें दिल खोलकर मुस्कुराने का मौक़ा दिया हो  सभी हमारे लिए यादगार बन जाते हैं और हमारे दिल के कोने में एक छोटा सा घर ब्नालेते है जहाँ हमारे सारे टीचर एक साथ मिलकर इन यादों के पौधे को सिंचतें हैं I तो अगर वक़्त मिले तब अपने इन टीचर्स को याद करना मत भूलियेगा चाहे वो खडूस चश्मिश ही क्यूँ ना हो I   

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10 Responses so far.

  1. Zakkas hi. Reality Hi ji..........!Bas.. aoar kay kahee....?

  2. बहुत खूब जबरदस्त काश मैं ऐसा लिख पाता
    बधाई

  3. shaank says:

    sahi kaha tumne aur wo sari yaadein bhi taza karwa de jin par thodi si dhool jam gyi thi thanx alot.. bhawna:)


    Ankita

  4. neha says:

    bahut tarraki karogi...........

  5. @sonal: thank u so much...

  6. @mukul:thank u sir...main bs apke jaisa likhne ki koshish kr rhi hu

  7. Anonymous says:

    Bhawna tmne such me bhot accha likha hai..

    is post ko padkar school ke dino ki yaad aa gayi..
    really nice.
    .
    .
    (N!k)

  8. बहुत उम्दा...शब्दों और भावनाओं का बेहतरीन तालमेल...पढकर मजा आया...

  9. target says:

    jhakaaaaas gud yaar....................

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