आज़माइश......


कोई ख्वाब आँखों में सजाया था मैंने,
कोई सपना शायद जगाया था मैंने...
उम्मीद की थी शायद किसी तारे कि,
दूर रहकर यूँही पास आने कि I   

शायद भुला बैठी थी ज़िन्दगी कि हकीकत,
तैयार की थी मोहब्बत कि झूठी इबारत...
तलाश थी ख़ुदा को पाने कि,
भूल गयी थी ख़ुदा पाना आसान नहीं I I 

लोग बात करते हैं चाँद पाने की,
ना जाने चाँद किसको पाना चाहता है...
मैं आजमाती हूँ रोज़ अपने दिल को.
ना जाने मेरा दिल किसको अजमाना चाहता है I I I

-भावना (its all about feelings)

11 Responses so far.

  1. Anonymous says:

    Nice...........Bhot gahrayi hai is kavita me
    .
    .
    (N!K)

  2. Mukul says:

    भावना मज़ा नहीं आ रहा है

  3. Bhawana going Gr8...Keep it up dear...
    my wishes are with u

  4. लोग बात करते हैं चाँद पाने की,
    ना जाने चाँद किसको पाना चाहता है...


    bhut sundar.........

  5. target says:

    hum khwahis karte hai dusro ko paane ki magar hum kabhi kabhi ye jaanne ki koshish tak nahi karte ki kya wo bhi hume paane k koshish karna bhi chahta hai ya nahi........
    good yaar

  6. pramod says:

    na jane mera dil kisko ajmana chahta hai........very nice

  7. मैं आजमाती हूँ रोज़ अपने दिल को.
    ना जाने मेरा दिल किसको अजमाना चाहता है...
    बहुत उम्दा ....

  8. @mukul sir: dubara koshish krungi sir

  9. @anshu, abhishaek, shubhi,target,pramod, zindagi: shukriya aap sbhi ka

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