क्यों बढ़ गई दूरियां


प्यारे भाई,

मैं, अरे वही तुम्हारी बहन और कौन. याद है कितना प्यारा बचपन था हमारा. तब तुझे ये पता न था कि तू बेटा है और मैं एक बेटी, हम तो बस प्यारे से शैतान बच्चे थे जो साथ में शैतानी करते थे, डाट खाते थे आर कभी-कभी एक-दूसरे को डाट से भी बचाते थे. लेकिन अब क्या हुआ? हम तो अब भी वही हैं न ! फिर हमारे बीच ये दूरियां क्यों बढ़ गई है? तू अब बड़ा हो गया है शायद बहुत बड़ा. तुम्हें क्यों लगता है कि मेरी भावनाएं नहीं हैं? क्या तुम्हें नहीं लगता कि तुम्हें मेरे साथ बैठकर बातें करनी चाहिए. आज हम-दोनों के बीच इतना फासला क्यों आ गया कि तुझसे बात करने से पहले सोचने की जरूरत पड़ जाती है. क्यों ऐसा लगता है मानों बात की शुरुआत दिल से नहीं दिमाग से करनी पड़े. क्यों हमारे बीच दोस्ती का वो रिश्ता अपना वजूद खोता जा रहा है? क्यों हम एक अजनबी की तरह से हो गए हैं.
     क्या तूने कभी नहीं सोचा कि बस कुछ बरस और, फिर ऐसा कुछ भी नहीं रहेगा. हम दोनों ही कुछ वक्त बाद अपनी-अपनी मंजिल की तरफ बढ़ चलेंगे, तब इतना वक्त न होगा बस यादें होंगी. क्या तुझे कभी एहसास नहीं होता कि मैं तुझसे दूर चली गई? क्या मेरे जाने से तेरी जिंदगी में कुछ भी फर्क नहीं पड़ेगा? बिल्कुल भी नहीं?? तूने हमेशा कहा कि काश मेरी जगह तेरा भाई होता तो शायद तेरी खुशी बहुत ज्यादा होती. तो आज तुझसे कुछ वादा करना चाहती हूं. वादा कि हमेशा तेरी बहन बनकर ही तेरे साथ रहूंगी. बहन क्यों! यही सोच रहा हैं है न.. तेरे इस सवाल का जवाब है मेरे पास- ऐसा इसलिए क्योंकि मेरी नजर में बहन से बड़ा कोई तोहफा नहीं होता एक भाई के पास.
     तुझसे बहुत सी बातें करने का दिल करता है. चाहती हूं कि तुझे अपने मन की हर वो बात बताऊं जो किसी से भी नहीं बांट सकती, लेकिन अब ऐसा कभी न हो पाएगा. एक बात का मलाल हमेशा ही रहेगा कि अबसे तुझे अपने दिल की कोई भी बात न बता पाऊंगी. चाहती तो थी कि तुझे अपने मन की हर बात बताऊं लेकिन तू सुनना ही नहीं चाहता. और कुछ नहीं लिखने को क्योंकि शब्द भी चोटिल से महसूस हो रहे हैं. बस चाहती हूं तू खुश रहे, चाहे मुझसे दूर रहे.

तेरी दीदी

(ये पाती मेरी एक दोस्त ने लिखी है, इसका एक भी शब्द मेरा नहीं है. बस उसे ये विश्वास दिलाना चाहती हूं कि भावनाएं किसी को भी लेखक बना सकती हैं क्योंकि उसकी नजर में वो लिख नहीं सकती.. उम्मीद है आप सभी को ये पाती पसंद आएगी।।)

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One Response so far.

  1. शायद उस रिश्तों के कसक को भी चिन्हित किया गया है जो दूरियाँ आज बनती जा रही .. "एक बात का मलाल हमेशा ही रहेगा कि अबसे तुझे अपने दिल की कोई भी बात न बता पाऊंगी. चाहती तो थी कि तुझे अपने मन की हर बात बताऊं लेकिन तू सुनना ही नहीं चाहता." ..... भावना जी आपके दोस्त को बधाई अपनी पाती साझा करने के लिये किसी और शब्दों के रंगों से रूबरू कराने के लिये !!

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